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भारत का दुनिया की ग्रोथ में योगदान 16 प्रतिशत, आने वाले समय में बढ़ेगी हिस्सेदारी : पीएम मोदी 

Source : business.khaskhabar.com | Feb 14, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india contribution to global growth is 16 percent share will increase in the future pm modi 791836नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत का दुनिया की ग्रोथ में योगदान बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है और आने वाले समय में यह हिस्सेदारी और भी बढ़ेगी।  
'ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट- 2026' में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत अब सिर्फ एक बाजार नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया की तरक्की को रफ्तार देने वाला 'ग्रोथ इंजन' बन गया है।"
उन्होंने आगे कहा कि पिछले दशक भारत के लिए न केवल आर्थिक रूप से बल्कि अपनी लोकतांत्रिक जड़ों को और मजबूत करने वाला रहा है। 10 साल पहले भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन आज भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नया वर्ल्ड ऑर्डर बना था, लेकिन अब सात दशक बाद टूट रहा है। नई व्यवस्थाएं बन रही हैं और भारत इस बदलाव को लीड कर रहा है। इस सदी में दुनिया में जो भी बड़े बदलाव हो रहे हैं, भारत उनका सबसे बड़ा आधार और केंद्र बनने जा रहा है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि पहले की सरकार में सुधार मजबूरी में किए जाते थे। 1991 में सुधार तब किए गए, जब देश दिवालिया होने वाला था। 2008 में मुंबई हमले के बाद एनआईए का गठन हो और पावर ग्रिड फेल होने के बाद के सुधार, लेकिन आज की सरकार समय और परिस्थितियों के मुताबिक पूरे दृढ़ विश्वास के साथ सुधारों को लागू कर रही है।
पीएम मोदी ने हाल ही हुए भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर चर्चा करते हुए कहा, "बीते 11 वर्षों में देश ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत आधार विकसित किया है और दुनिया से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है। इसी कारण भारत ने 38 देशों के साथ एफटीए किए हैं।"
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत सुधार की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार अपने सुधार प्रयासों में अजेय है। जिस सुधार ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, वह है यूपीआई। यह सिर्फ एक मोबाइल ऐप नहीं है, बल्कि सुदृढ़ नीति, प्रक्रिया और शक्तिशाली तकनीक के संगम का परिणाम है। यूपीआई आज उन नागरिकों की सेवा कर रहा है, जिन्होंने कभी बैंकिंग या वित्त के बारे में सोचा भी नहीं था। यह वित्तीय समावेशन में एक क्रांति है। डिजिटल इंडिया और ये सभी प्रणालियां किसी दबाव या विवशता के तहत नहीं बनाई गई हैं, बल्कि हमारे दृढ़ विश्वास का परिणाम हैं।
--आईएएनएस
 

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