businesskhaskhabar.com

Business News

Home >> Business

सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात 13 प्रतिशत घटा, बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संकट का असर: रिपोर्ट

Source : business.khaskhabar.com | Oct 19, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 india crude oil imports from russia drop 13 in september amid rising prices and west asia crisis report 854257नई दिल्ली । बढ़ती तेल कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण सितंबर में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात 13 प्रतिशत घट गया। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, यह लगातार दूसरा महीना है जब रूसी कच्चे तेल का आयात कम हुआ है और अप्रैल के बाद यह सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। 
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते लाल सागर (रेड सी) के व्यापार मार्ग और होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों प्रभावित हुए, जिससे वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ा और कीमतों में उछाल आया।
भारत में रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित जामनगर रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का आयात 27 प्रतिशत घटा। वहीं इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की पारादीप रिफाइनरी में आयात 21 प्रतिशत कम हुआ, जबकि नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में इसमें 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सितंबर में भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार बना रहा। इस दौरान भारत ने 4.1 अरब यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया, जिसमें 88 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल का था। रूस से इससे अधिक खरीद केवल चीन ने की।
सीआरईए की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2022 से अब तक रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत रही है, जबकि चीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही।
इस बीच भारत और चीन के लिए बड़ी राहत देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी कर रूसी तेल निर्यात से जुड़े कई प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दे दी। ये प्रतिबंध अगले दिन लागू होने वाले थे। ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय अमेरिका के “राष्ट्रीय हित” में लिया गया है। इससे भारत और चीन को मौजूदा स्तर पर रूसी तेल आयात जारी रखने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में रूस के यूराल ग्रेड कच्चे तेल की औसत कीमत महीने-दर-महीने 32 प्रतिशत बढ़कर 90.7 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यह अप्रैल 2026 के बाद सबसे ऊंचा मासिक औसत स्तर है और यूरोपीय संघ तथा ब्रिटेन द्वारा निर्धारित 44.1 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से दोगुने से भी अधिक है। यह मूल्य सीमा 1 फरवरी 2026 से प्रभावी हुई थी और यूरोपीय संघ के 21वें प्रतिबंध पैकेज के तहत इसे बरकरार रखा गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर में होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल परिवहन में महीने-दर-महीने 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई, इसके बावजूद वैश्विक जीवाश्म ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहीं। हालांकि, यह स्तर अभी भी अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले के स्तर से नीचे है।
सीआरईए के अनुसार, होर्मुज ऊर्जा संकट ने रूस की जीवाश्म ईंधन निर्यात आय को भी बड़ा बढ़ावा दिया है। संस्था के विश्लेषण के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद के छह महीनों में तेल और गैस की ऊंची कीमतों के कारण रूस की समुद्री मार्ग से होने वाली निर्यात आय में लगभग 35.9 अरब डॉलर (करीब 31 अरब यूरो) की अतिरिक्त वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस का जीवाश्म ईंधन निर्यात अभी भी कुछ प्रमुख खरीदारों पर अत्यधिक निर्भर है। चीन कच्चे तेल और कोयले का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, तुर्किये तेल उत्पादों की सबसे बड़ी खरीद कर रहा है, जबकि यूरोपीय संघ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और पाइपलाइन गैस का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि मॉस्को का ऊर्जा निर्यात कुछ चुनिंदा बाजारों पर काफी हद तक निर्भर है।
--आईएएनएस
 

[@ संबंध बनाते बुजुर्ग की मौत,सर्जरी से किया अलग ]


[@ घर के कई वास्तु दोष दूर करती है तुलसी ]


[@ यह उपाय करने से शांत होंगे शनि दोष]