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बांग्लादेश में महंगाई संकट की वजह सिर्फ आपूर्ति की कमी नहीं, अर्थव्यवस्था की गहरी संरचनात्मक कमजोरियां: रिपोर्ट

Source : business.khaskhabar.com | Sep 26, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 deep seated structural weaknesses in the economy not just supply shortages drive bangladesh inflation crisis report 847959नई दिल्ली । बांग्लादेश में लगातार बढ़ी हुई महंगाई केवल वैश्विक बाजार की अस्थिरता या अस्थायी आपूर्ति संकट का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे अर्थव्यवस्था की गहरी संरचनात्मक कमजोरियां और नीतिगत खामियां जिम्मेदार हैं। यह बात बांग्लादेश के अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड की एक नई रिपोर्ट में कही गई है।
 
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में महंगाई को कमजोर प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, परिवहन और भंडारण व्यवस्था की कमियां, बाजार में अत्यधिक एकाधिकार और व्यापक आर्थिक नीतियों में देरी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ावा दे रही हैं।


एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के सितंबर पूर्वानुमान का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में औसत वार्षिक महंगाई 8.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि 2026-27 में यह 9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, मुद्रा विनिमय दर में गिरावट और आयातित ईंधन की बढ़ी लागत भी महंगाई के प्रमुख कारण बताए गए हैं।


रिपोर्ट में बाजार की एक असमान प्रवृत्ति का भी जिक्र किया गया है, जिसमें लागत बढ़ने पर वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ जाते हैं, लेकिन लागत घटने के बावजूद कीमतें उसी गति से कम नहीं होतीं। इसके लिए कमजोर बाजार निगरानी और अप्रभावी प्रतिस्पर्धा नीति को जिम्मेदार ठहराया गया है।


रिपोर्ट के मुताबिक, सख्त मौद्रिक नीति से महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है, लेकिन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन पर सरकार के बढ़ते खर्च से अतिरिक्त जोखिम पैदा हो रहे हैं।


राजस्व संग्रह भी संरचनात्मक रूप से कमजोर बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 2.26 लाख करोड़ टका के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया गया है, जिसमें 1.25 लाख करोड़ टका घरेलू स्रोतों से जुटाने की योजना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सरकारी खर्च टिकाऊ राजस्व की तुलना में तेजी से बढ़ता रहा तो सरकार की उधारी पर निर्भरता और बढ़ेगी।


रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सरकार की अधिक उधारी से घरेलू तरलता पर दबाव बढ़ सकता है और वित्तपोषण की लागत भी बढ़ सकती है। यदि घाटे की भरपाई के लिए अत्यधिक उदार वित्तपोषण किया गया तो महंगाई का दबाव और तेज हो सकता है।


रिपोर्ट में सरकार से मध्यम अवधि की ऐसी विश्वसनीय योजना तैयार करने की अपील की गई है, जिसमें नए खर्चों को टिकाऊ राजस्व स्रोतों से जोड़ा जाए। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमताओं, ईंधन मूल्य निर्धारण व्यवस्था, पेट्रोलियम उत्पादों पर कर बोझ और संबंधित संस्थानों की वित्तीय कमजोरियों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता बताई गई है।


रिपोर्ट के अनुसार, नीतिगत अनिश्चितता, नियामकीय जटिलताओं, ऊर्जा संकट और संस्थागत कमजोरियों के कारण निजी निवेश भी कमजोर बना हुआ है, जिससे अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है।


--आईएएनएस


 

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