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हिमाचल का राजकोषीय घाटा सीमा से ज्यादा, राजस्व का 86 प्रतिशत वेतन और सब्सिडी पर खर्च

Source : business.khaskhabar.com | Sep 04, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 himachal fiscal deficit exceeds limits 86 of revenue spent on salaries and subsidies 841938शिमला । भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति की चिंताजनक तस्वीर पेश की है। सीएजी ने तेजी से बढ़ते कर्ज के बोझ, राजकोषीय घाटे की सीमा के उल्लंघन और विकास एवं पूंजीगत व्यय के लिए धन की घटती उपलब्धता पर चिंता व्यक्त की। 
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा राज्य विधानसभा में पेश की गई वित्तीय वर्ष 2024-25 की सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य का राजकोषीय घाटा राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) ढांचे के तहत निर्धारित सीमा को पार कर गया है।
राज्य का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपए रहा, जबकि राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपए या जीएसडीपी का 5.44 प्रतिशत तक पहुंच गया।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार एफआरबीएम अधिनियम के तहत निर्धारित लक्ष्यों के भीतर इन घाटे को नियंत्रित करने में विफल रही।
राज्य की बकाया देनदारियां भी 15वें वित्त आयोग और राज्य के स्वयं के बजट अनुमानों द्वारा अनुशंसित लक्ष्यों से काफी अधिक थीं।
लेखापरीक्षा रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति का लगभग 86 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित व्यय और सब्सिडी में खर्च हो रहा है, जिससे अवसंरचना विकास और पूंजी निवेश के लिए बहुत कम राशि उपलब्ध हो पा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर ही राजस्व व्यय का लगभग 70 प्रतिशत खर्च हो रहा है।
सीएजी ने बिजली सब्सिडी और ऋण राहत उपायों पर बढ़ते व्यय पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस तरह की प्रतिबद्धताएं राज्य की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विकासात्मक गतिविधियों और पूंजीगत व्यय के लिए केवल 14 प्रतिशत राजस्व संसाधन शेष रहने के कारण, राज्य को अवसंरचना निर्माण और दीर्घकालिक निवेश करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीएजी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने 2024-25 के दौरान 9.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
हालांकि, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में राज्य का योगदान मात्र 0.70 प्रतिशत रहा और पिछले पांच वर्षों में इसमें गिरावट आई है, जिसे राष्ट्रीय लेखा परीक्षक ने चिंता का विषय बताया है।
राज्य की राजस्व प्राप्ति में 4.34 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह और केंद्रीय करों में इसकी हिस्सेदारी का योगदान रहा।
गैर-कर राजस्व में भी 22.40 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
कुछ राजस्व स्रोतों में सुधार के बावजूद, सीएजी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अभी भी केंद्र से मिलने वाले अनुदानों पर अत्यधिक निर्भर है।
रिपोर्ट में सरकारी निधियों के प्रबंधन में कुछ अनियमितताओं को भी उजागर किया गया है।
इसमें कहा गया है कि मिल्क सेस, एनवायरनमेंट सेस और बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस जैसे लेवी से इकट्ठा किए गए फंड को सरकारी खाते से बाहर रखा गया था।
--आईएएनएस

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