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प्रमुख ब्याज दर पर आरबीआई के कदम को इंडिया इंक ने सराहा

Source : business.khaskhabar.com | Feb 09, 2018 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india inc praised the rbi move at key interest rate 293127नई दिल्ली। देश के उद्योग व वाणिज्य संगठनों, कॉरपोरेट जगत की हस्तियों व कारोबारियों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रमुख ब्याज दर यथावत छह फीसदी रखने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह ‘उम्मीदों’ के अनुरूप है।

मौद्रिक नीति समीक्षा के अलावा, भारतीय काराबारियों ने आरबीआई द्वारा सूक्ष्म, लघु व मझौले स्तर के उद्यमों (एमएसएमई) को कर्ज का भुगतान करने के लिए समयावधि बढ़ाकर 180 दिन कर राहत प्रदान करने के फैसले का भी स्वागत किया।

आरबीआई ने लगातार तीसरी बार अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। चालू वित्त वर्ष में यह आरबीआई की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी, जिसमें केंद्रीय बैंक ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बढ़ातरी व अन्य घरेलू कारकों को ध्यान में रखते हुए वाणिज्यिक बैंक को अल्पावधि ऋण मुहैया करवाने के लिए प्रमुख ब्याज दर को स्थिर रखा।

भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष रजनीश कुमार ने कहा, ‘‘आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा व्यावहारिक व संतुलित है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी छमाही में महंगाई में नरमी रहने की संभावना जताई है। इससे बांड मार्केट पर सकारात्मक  असर होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ब्याज दर मे स्थिर रुख की उम्मीद की जा रही थी। इसके अलावा एमएसएमई कजदारों को के प्रति सहनशीलता बरते हुए प्राथमिकता के क्षेत्र में कर्ज की परिभाषा में विस्तार करने व रेपो के मार्ग को सरलीकृत किए जाने समेत सारे स्थिर समष्टिगत माहौल की दिशा में सकारात्मक कदम है।’’

एसोचैम के अध्यक्ष संदीप जाजोदिया ने कहा, ‘‘आरबीआई के फैसले से भारतीय कारोबारियों को राहत मिलेगा। केंद्रीय बैंक की ओर से महंगाई दर पांच फीसदी के पार जाने और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता रहने संबंधी कुछ जो चिंताएं जाहिर की गईं हैं वह जायज हैं।’’

फिक्की के अध्यक्ष रशेश शाह ने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं कि ब्याज दरों में कटौती का मौका गंवा दिया गया, जिससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलता। हालांकि हम उम्मीद करते हैं कि आरबीआई विकास की चिंताओं पर भी समान रूप से विचार करेगा, खासतौर से भारत में महंगाई का दबाव कृषि क्षेत्र में पूर्ति के कारकों को लेकर ज्यादा है।’’
(आईएएनएस)

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