भारतीय आईपीओ पाइपलाइन 3.86 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर, 2026 में अब तक की कुल जुटाई राशि से 3.5 गुना अधिक : AIBI रिपोर्ट
Source : business.khaskhabar.com | Sep 28, 2026 | 

बिजनेस डेस्क। मुंबई भारतीय प्राथमिक पूंजी बाजार अब समय-समय पर आने वाले सामान्य आईपीओ चक्रों से आगे निकलकर एक गहरे, सुदृढ़ और निरंतर पूंजी निर्माण के तंत्र में तब्दील हो चुका है। देश के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग उद्योग के शीर्ष निकाय, 'एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया' (AIBI) द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी मिड-टर्म व्हाइट पेपर "इंडिया कैपिटल मार्केट्स: नेविगेटिंग जियोपॉलिटिक्स, कैपिटल एंड ग्रोथ" में यह अहम तथ्य सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 तक मेनबोर्ड आईपीओ पाइपलाइन लगभग ₹3.86 लाख करोड़ के विशाल स्तर पर पहुंच चुकी है, जो कि वर्ष 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए जुटाई गई ₹1.10 लाख करोड़ की राशि से करीब 3.5 गुना ज्यादा है।
इस ₹3.86 लाख करोड़ की पाइपलाइन में लगभग 130 ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिन्हें सेबी (SEBI) से आईपीओ की अंतिम मंजूरी मिल चुकी है (लगभग ₹2.43 लाख करोड़ मूल्य), जबकि करीब 75 कंपनियां अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं (लगभग ₹1.44 लाख करोड़ मूल्य)। यह बड़ा आकार सार्वजनिक बाजार में कंपनियों की निरंतर रुचि और भारत के पूंजी बाजार की अभूतपूर्व गहराई को दर्शाता है।
दशक भर का ढांचागत बदलाव और पूंजी निर्माणः रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2016 से 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के माध्यम से कुल ₹8.36 लाख करोड़ जुटाए गए हैं। वार्षिक पूंजी जुटाने का आंकड़ा 2016 के ₹26,494 करोड़ (26 आईपीओ) से बढ़कर 2025 में ₹1.76 लाख करोड़ (103 आईपीओ) हो गया, जबकि 2026 में अब तक 84 निर्गमों से ₹1.10 लाख करोड़ आ चुके हैं।
एआईबीआई के चेयरमैन महावीर लूणावत ने कहा कि यह वृद्धि केवल आईपीओ के दौर तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू संस्थागत व खुदरा निवेशकों (QIB, HNI और रिटेल) की मजबूत भागीदारी से प्राथमिक बाजार पूंजी निर्माण का टिकाऊ माध्यम बन गया है। 2026 में अब तक औसतन क्यूआईबी में 49 गुना, एचएनआई में 86 गुना और रिटेल श्रेणी में 26 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज हुआ है। इसके अलावा, देश में मर्चेंट बैंकर्स की संख्या भी सितंबर 2016 के 188 से 33 प्रतिशत बढ़कर सितंबर 2026 में 250 हो चुकी है।
एसएमई (SME) सेगमेंट में भी रिकॉर्ड उछालः बाजार का विस्तार केवल बड़े निर्गमों तक ही सीमित नहीं है। एसएमई आईपीओ पारिस्थितिकी तंत्र ने भी भारी प्रगति की है। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 267 एसएमई आईपीओ आए थे, जबकि 2026 में अब तक 156 एसएमई इश्यू आ चुके हैं। वर्ष 2016 से 2026 तक एसएमई ने कुल ₹39,849 करोड़ की पूंजी जुटाई है, जबकि औसत एसएमई इश्यू का आकार 2016 के ₹8 करोड़ से उछलकर 2026 में ₹45 करोड़ हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में बाजार का ध्यान सिर्फ आईपीओ की संख्या पर नहीं, बल्कि जारीकर्ताओं की गुणवत्ता, डिस्क्लोजर और 'विकसित भारत' के संकल्प के तहत पूंजी के दीर्घकालिक उत्पादक उपयोग पर केंद्रित होगा।
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