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एचडीएफसी बैंक के अगले सीईओ की रेस में कैजाद भरूचा सबसे आगे, शशिधर जगदीशन के रिटायरमेंट के बाद संभाल सकते हैं कमान: रिपोर्ट

Source : business.khaskhabar.com | Aug 31, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 kaikzad bharucha frontrunner to become hdfc banks next ceo may take charge after sashidhar jagdishans retirement report 840808नई दिल्ली । एचडीएफसी बैंक के उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा बैंक के अगले प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी एवं सीईओ) बनने की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। यह संभावना उस समय मजबूत हुई है जब मौजूदा प्रमुख शशिधर जगदीशन ने अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। 
एनडीटीवी प्रॉफिट ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अक्टूबर 2026 में जगदीशन के कार्यकाल की समाप्ति के बाद एचडीएफसी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को संभावित उत्तराधिकारियों की सूची भेजेगा, जिसमें कैजाद भरूचा का नाम प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हो सकता है।
आरबीआई के नियमों के तहत निजी क्षेत्र के बैंकों को सीईओ पद के लिए दो से तीन संभावित उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में केंद्रीय बैंक को स्वीकृति के लिए भेजने होते हैं। अंतिम नियुक्ति आरबीआई की मंजूरी के बाद ही होती है।
कैजाद भरूचा एचडीएफसी बैंक के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। वह जून 2014 से बैंक के निदेशक मंडल का हिस्सा हैं और वर्तमान में उप प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। बैंक के संचालन, जोखिम प्रबंधन और व्यवसायिक रणनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके कारण उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि उनके संभावित कार्यकाल को लेकर एक नियामकीय चुनौती भी सामने आ सकती है। नियमों के अनुसार किसी पूर्णकालिक निदेशक की लगातार सेवा अवधि 15 वर्षों तक सीमित होती है। चूंकि भरूचा जून 2014 में बोर्ड में शामिल हुए थे, इसलिए वे जून 2029 में इस सीमा तक पहुंच जाएंगे।
ऐसी स्थिति में यदि वह अक्टूबर 2026 में सीईओ बनते हैं, तो उनका संभावित कार्यकाल तीन वर्ष से भी कम रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि आरबीआई विशेष अनुमति देता है तो इस अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एचडीएफसी बैंक अन्य उम्मीदवारों के नामों पर भी विचार कर सकता है। आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंक की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति को मौजूदा प्रमुख का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम छह महीने पहले उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू करनी होती है और इसमें आंतरिक तथा बाहरी दोनों प्रकार के उम्मीदवारों पर विचार करना आवश्यक होता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में लंबे समय तक बैंक का नेतृत्व करने वाले आदित्य पुरी के सेवानिवृत्त होने के बाद भी उत्तराधिकार प्रक्रिया में शशिधर जगदीशन सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरे थे और अंततः उन्हें सीईओ नियुक्त किया गया था।
ऐसे में, अब एचडीएफसी बैंक ऐसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है जब वह एचडीएफसी लिमिटेड के साथ हुए ऐतिहासिक विलय के बाद अपने विस्तारित कारोबार का एकीकरण और विस्तार कर रहा है। ऐसे में नए सीईओ का चयन बैंक की भविष्य की रणनीति, विकास और निवेशकों के विश्वास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
--आईएएनएस
 

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