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वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बाजार पर दबाव, हफ्ते भर में सेंसेक्स और निफ्टी में आई 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट

Source : business.khaskhabar.com | Oct 24, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 market under pressure due to global uncertainties sensex and nifty fall by over 2 for the week 855773मुंबई । कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह चुनौतीपूर्ण रहा। अवकाश के कारण छोटा रहा कारोबारी सप्ताह भी निवेशकों के लिए राहत नहीं ला सका और प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों में लगातार चौथे सत्र गिरावट दर्ज की गई। वहीं पूरे सप्ताह में निफ्टी 50 में लगभग 2.4 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 2.2 प्रतिशत की गिरावट रही। 
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 73,123.83 पर और निफ्टी 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,600.00 पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतें घरेलू बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी हैं। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों में अपनी हिस्सेदारी कम की, जिसका असर सिर्फ लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रहा बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में और अधिक तेज गिरावट देखने को मिली।
निफ्टी 50 लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद दबाव में बना हुआ है। हालिया बिकवाली ने बाजार की अल्पकालिक तकनीकी संरचना को कमजोर किया है और सूचकांक अपनी पिछली रिकवरी को बरकरार रखने में संघर्ष कर रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) के रूप में देखा जा रहा है, जबकि इसके ऊपर 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं, दूसरी ओर सेंसेक्स के लिए 72,600 से 72,500 का दायरा निकटतम समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र माना जा रहा है।
व्यापक बाजार में गिरावट का असर अधिक दिखाई दिया। ऊंचे वैल्यूएशन और लीवरेज्ड पोजिशन में कमी के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज करेक्शन आया, जबकि लार्जकैप शेयर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहे।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र ही ऐसा रहा जिसने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई। सप्ताह की शुरुआत में बिकवाली के दबाव में रहने के बावजूद बेहतर तिमाही नतीजों और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण आईटी शेयरों ने सप्ताह लगभग स्थिर स्तर पर समाप्त किया।
इसके विपरीत, ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली हुई, क्योंकि बढ़ती लागत और मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।
वैश्विक कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड 3.1 प्रतिशत की तेजी के साथ 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 29 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 3.8 प्रतिशत बढ़कर 103.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
पूरे सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड में 6.2 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई में 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे परिवहन और ऊर्जा लागत बढ़ेगी, उपभोक्ता मांग पर असर पड़ेगा और तेल पर निर्भर उद्योगों के मार्जिन पर अतिरिक्त दबाव आएगा। यही कारण है कि आने वाले हफ्तों में भी निवेशकों की नजर सबसे ज्यादा कच्चे तेल की चाल और उससे जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी।
--आईएएनएस

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