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आरबीआई की दिसंबर एमपीसी में 50 आधार अंक तक बढ़ सकती है रेपो रेट : एसबीआई रिसर्च

Source : business.khaskhabar.com | Oct 07, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 rbi may hike repo rate by up to 50 basis points in december mpc sbi research 851233नई दिल्ली। आरबीआई दिसंबर की मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 50 आधार अंक तक बढ़ सकता है। हालांकि, यह बढ़ोतरी काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यह बयान एसबीआई रिसर्च द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट में दिया गया।  

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि जल्द ही ग्लोबल हालात अस्थिर हो सकते हैं, इसलिए आरबीआई को छोटी-छोटी बढ़ोतरी के बजाय एक बार में ही दरें बढ़ाने का मौका चुनना चाहिए।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा, "दिसंबर तक रेपो रेट को 6 प्रतिशत करना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।"

आरबीआई की एमपीसी में रेपो रेट को सर्वसम्मति से 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अब आगे नीतिगत विकल्प असल में या तो दरें बढ़ाने या उन्हें स्थिर रखने तक ही सीमित हैं, जो बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

डॉ. घोष ने कहा, "आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 40आधार अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत और खुदरा महंगाई अनुमान 20 आधार बढ़ाकर 5.20 प्रतिशत कर दिया है। हमारा मानना ​​है कि वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।"

रेपो रेट से जुड़े कदम के अलावा, डॉ. घोष ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि अक्टूबर की पॉलिसी से जुड़ी बातचीत सतर्कता से हटकर साफ तौर पर सख्ती की ओर बढ़ने का संकेत देती है। गवर्नर के बयान और मॉनेटरी पॉलिसी स्टेटमेंट के हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि इस बार उनके रुख में काफी समानता है, जो पिछली पॉलिसी साइकिल में देखी गई बातचीत में अंतर से एक बड़ा बदलाव है।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि कैपिटल फ्लो को आसान बनाने के लिए भारत को एक स्पष्ट एआई पॉलिसी की जरूरत है, क्योंकि स्पष्ट पॉलिसी के बिना कैपिटल फ्लो की संभावना कम है। साथ ही, इसमें यह भी कहा गया है कि रुपये के लिए सुरक्षा उपाय करने की जरूरत है, क्योंकि यह अब एक चिंताजनक बेंचमार्क की ओर बढ़ रहा है।

एसबीआई ने आरबीआई के पुराने पॉलिसी साइकल का जो एनालिसिस किया है, उससे पता चलता है कि ब्याज दरें बढ़ाने का दायरा महंगाई के दबाव की तीव्रता और उसके बने रहने की अवधि के हिसाब से तय किया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि जैसे-जैसे आरबीआई के अलग-अलग दौर में महंगाई का माहौल नरम हुआ, पॉलिसी रेट का पीक लेवल भी कम होता गया। इस पुराने ट्रेंड को देखते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारे अनुमान बताते हैं कि नवंबर 2026 में महंगाई के लगभग 6.8 प्रतिशत के पीक पर पहुंचने की उम्मीद है, और इस तरह पीक रेपो रेट लगभग 6.0 प्रतिशत हो सकता है।"

हालांकि, महंगाई के ट्रेंड में बदलाव के आधार पर ब्याज दरें बढ़ाने की मात्रा और रफ्तार में काफी अंतर हो सकता है। टाइटनिंग साइकल की रफ्तार भी उतनी ही अहम है।

--आईएएनएस

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