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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय तेल कंपनियों के शेयर 9 प्रतिशत तक लुढ़के

Source : business.khaskhabar.com | Mar 09, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 shares of indian oil companies fell up to 9 percent on the rise in crude oil prices 797098मुंबई। मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इसके असर से सोमवार को भारतीय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के शेयर 7 से 9 प्रतिशत तक टूट गए।

इस महीने अब तक इन तीनों सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में करीब 14-15 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, जिससे उनकी कमाई पर दबाव पड़ता है। कारोबार के दौरान सबसे ज्यादा गिरावट एचपीसीएल के शेयरों में देखी गई, जो करीब 8.7 प्रतिशत तक टूट गए। इसके बाद बीपीसीएल के शेयर लगभग 7.99 प्रतिशत और आईओसीएल के शेयर करीब 7.2 प्रतिशत तक गिर गए। 

खबर लिखे जाने तक (दोपहर करीब 12.36 बजे) एनएसई पर एचपीसीएल का शेयर 6.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 379.20 रुपए पर ट्रेड करता नजर आया। तो वहीं, बीपीसीएल का शेयर 5.50 प्रतिशत गिरकर करीब 333.55 रुपए पर और आईओसीएल का शेयर 8.64 प्रतिशत गिरकर 160 रुपए के आसपास कारोबार करता दिखा। 

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, क्योंकि मध्य पूर्व के बड़े तेल उत्पादकों ने उत्पादन कम कर दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति लगभग बंद जैसी स्थिति में है। 

पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी, क्योंकि युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। आखिरी बार तेल की कीमतें इस स्तर पर 2022 में देखी गई थीं, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था। 

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर मध्य-पूर्व की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा पर बनी हुई है। 

विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ बाजार अनुमानों के अनुसार, इस साल के अंत तक कच्चा तेल 143 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। ऊर्जा इतिहासकार डेनियल येर्गिन ने कहा कि यह स्थिति रोजाना तेल उत्पादन के लिहाज से दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा व्यवधान बन सकती है। इस संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी पड़ रहा है। 

वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर एशिया और यूरोप पर पड़ सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र ऊर्जा के लिए फारस की खाड़ी से आने वाले आयात पर ज्यादा निर्भर हैं। -आईएएनएस

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