टाटा पंच और नेक्सन बनीं कंपनी की रीढ़: मई में दिया 60 प्रतिशत बिक्री का योगदान
मई 2025 में टाटा मोटर्स की कुल बिक्री 11% गिरी, लेकिन पंच और नेक्सन ने कुल बिक्री का 60% (26,000+ यूनिट्स) योगदान दिया। टाटा पंच की 13,133 यूनिट्स बिकीं, जबकि नेक्सन ने 13,096 यूनिट्स के साथ 14% की वृद्धि दर्ज की। मल्टी-फ्यूल विकल्पों और उच्च सुरक्षा रेटिंग के कारण ये दोनों SUV कंपनी की बिक्री की रीढ़ बनी हुई हैं, जो ग्राहकों के मजबूत भरोसे को दर्शाती हैं।
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की बैठक में दाल मिल एसोसिएशन ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की एक बैठक में ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन ने 2026-27 रबी फसलों की मूल्य नीति पर सुझाव दिए, जिसमें किसानों के लिए MSP बढ़ाना, दालों के आयात पर ड्यूटी लगाना, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना, मंडी शुल्क को पूरे भारत में एकसमान 0.50% करना, और नेफेड द्वारा खरीदी गई उपज को एक साल के भीतर बेचना शामिल है, ताकि किसानों और घरेलू उद्योग को समर्थन मिल सके ।
मध्य प्रदेश में तुअर दाल पर मंडी शुल्क समाप्त, दाल उद्योग को मिलेगी राहत
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बाहर से प्रसंस्करण हेतु मंगाई जाने वाली तुअर (अरहर) पर मंडी शुल्क पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। यह निर्णय 10 जून, 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा लिया गया। इस छूट से मध्य प्रदेश की दाल मिलों को प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी, दालों का उत्पादन बढ़ेगा, और उपभोक्ताओं को सस्ती तुअर दाल उपलब्ध होगी। ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन (AIDMA) ने इस कदम का स्वागत किया है, हालांकि चना, उड़द, मसूर और मूंग पर भी मंडी शुल्क समाप्त करने का अनुरोध किया है।
भारत की तेज जीडीपी वृद्धि का असर, कंपनियों और एलएलपी का पंजीकरण 37 प्रतिशत तक बढ़ा
जीडीपी में तेज वृद्धि के कारण देश में मई में कंपनियों और एलएलपी के पंजीकरण में 37 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।
मंडियों में सरसों की आवक घटने से कीमतों में भारी उछाल, जयपुर में ₹6750 प्रति क्विंटल पहुंची कीमतें
जयपुर मंडी में सरसों की कीमतें ₹6750 प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं, क्योंकि आवक कम और मांग अधिक है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सरसों खल की बढ़ती मांग और कम उत्पादन अनुमान (105 लाख टन) भी कीमतों को बढ़ा रहे हैं। किसानों द्वारा फसल रोकने से भी भावों को मजबूती मिली है, और विशेषज्ञों को आगे मंदी की उम्मीद नहीं है।
गेहूं निर्यात पर रोक से राजस्थान की आटा मिलें संकट में, एसोसिएशन ने PM से लगाई गुहार
एसोसिएशन ने अपनी आर्थिक चुनौतियों को उजागर करते हुए कहा कि उनकी फैक्ट्री चले या न चले, दैनिक खर्च एक लाख रुपये से अधिक है। प्रत्येक मिल में औसतन 100 कर्मचारी काम करते हैं, और इन सभी परिवारों का जीवन कारखानों से जुड़ा हुआ है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे मजबूरन अपने कारखानों पर ताला लगाने के लिए विवश हो जाएंगे, और यह संकट केवल एक मिल का नहीं, बल्कि सभी फ्लोर मिल मालिकों का है।