कार खरीदना होगा और भी सुरक्षित, BNCAP 2.0 और 5 नए क्रैश टेस्ट होंगे लागू
Source : business.khaskhabar.com | Oct 24, 2026 | 

ऑटो डेस्क। नई दिल्ली इस महीने केंद्र सरकार ने कार सुरक्षा के लिए कड़े नियम नोटाफॉई किए हैं जिसे भारत में बिकने वाली हर नई कार को पूरा करना होगा। इन्हें अक्टूबर 2027 से 2032 के बीच चरणों में लागू किया जाएगा।
इन नियमों में यह देखा जाएगा कि कार के अंदर बैठे लोगों का आगे, साइड और पीछे की टक्कर में क्या हाल होता है और साथ ही इसमें यह टेस्ट भी शामिल है कि कार से टक्कर लगने पर पैदल चलने वाले शख्स पर क्या असर पड़ता है। ये कानूनी नियम हैं और यह एक थ्रेशहोल्ड है जिसे मार्केट में बेचे जाने से पहले हर कार को पूरा करना ही होगा।
BNCAP और नए नियमः सरकार Bharat NCAP नाम से एक प्रोग्राम चलाती है जो कारों को सुरक्षा के मुताबिक 1 से 5 स्टार रेटिंग देता है। इसके साथ ही, अक्टूबर 2027 से ज्यादा सख्त नियमों वाल BNCAP 2.0 शुरू होने जा रहा है। इन नए नियमों और भारत NCAP 2.0 को लाने का मकसद देश की रोड सेफ्टी को बेहतर बनाना।
सड़क हादसों के आंकड़ेः सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में देश भर में कुल 4,80,583 सड़क हादसे हुए जिसमें 1,72,890 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 44.8% लोग टू-व्हीलर जैसे बाइक या स्कूटर चलाने वाले थे और 20.4% पैदल चलने वाले लोग थे। इसका मतलब यह है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाले हर तीन लोगों में से करीब दो लोग कार के बाहर थे।
टाइप अप्रूवल प्रोसेसः भारत में कोई भी नई कार बिक्री के लिए आने से पहले निर्माता कंपनी को यह साबित करना होता है कि वह सेंट्रल मोटर एक्ट नियमों के तहत किए गए क्रैश टेस्ट और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरा करती है। इन अनिवार्य प्रोसेस को टाइप अप्रूवल कहा जाता है।
सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2019 से सभी कार मॉडलों के लिए दो मुख्य क्रैश टेस्ट अनिवार्य कर दिए गए हैं। फ्रंटल टेस्ट में भारत UN के नियमों का पालन करता है जिसमें कार को 56kmph की स्पीड से एक बैरियर से टकराया जाता है।
फ्रंटल और साइड क्रैशः कार के केवल एक हिस्से पर असर पड़ने वाली टक्कर और साइड से होने वाली टक्कर में अंदर बैठे लोगों की सुरक्षा के लिए रिवाइज्ड स्टैंडर्ड लागू किए गए हैं। ये नए मॉडल पर अक्टूबर 2027 से और सभी मॉडलों पर अक्टूबर 2028 से लागू होंगे। भारत का संशोधित फ्रंटल मानक UN के नए नियमों पर आधारित है। यह टेस्ट रीस्ट्रेंट सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करता है। इसके लिए एक रिवाइज्ड स्टैंडर्ड नए मॉडलों पर अक्टूबर 2029 से और सभी मॉडलों पर अक्टूबर 2031 से लागू होगा।
पैदल वालों की सेफ्टीः पैदल यात्रियों और सड़क पर चलने वाले बाकी लोगों की सुरक्षा के लिए एक रिवाइज्ड स्टैंडर्ड अक्टूबर 2028 से नए मॉडलों पर लागू होगा। अक्टूबर 2032 से इन परीक्षणों में फ्लेक्सिबल पेडेस्ट्रियन लेग इंपेक्टर का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा जो एक एक ऐसा टेस्टिंग इक्विपमेंट है जो यह मापता है कि कार के अगले हिस्से से टक्कर लगने पर पैदल वालों के पैर में कितनी चोट आएगी।
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