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गिरता रुपया लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका: सीईए नागेश्वरन

Source : business.khaskhabar.com | Apr 24, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 falling rupee presents buying opportunity for long term investors cea nageswaran 808744नई दिल्ली । भारत की करेंसी फिलहाल दबाव में हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी स्थिति मजबूत बनी हुई है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि रुपया 'मौलिक रूप से कम मूल्यांकित' (अंडरवैल्यूड) है और निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका है। 
ब्लूमबर्ग से बातचीत में उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में रुपए का स्तर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा एंट्री पॉइंट है, खासकर उन लोगों के लिए जो भारत की ग्रोथ पर भरोसा रखते हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब रुपया वैश्विक कारणों की वजह से लगातार दबाव में है।
शुक्रवार को भी रुपया लगातार पांचवें दिन गिरा और शुरुआती कारोबार में 24 पैसे कमजोर होकर 94.25 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
इस गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जिसका कारण पश्चिम एशिया में तनाव है। इससे ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है और महंगाई की चिंता बढ़ी है।
रुपए पर दबाव बढ़ने की एक और वजह विदेशी निवेशकों का रुख है। भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी (एफपीआई आउटफ्लो) हो रही है, जो इस महीने ही पिछले साल के रिकॉर्ड 18.79 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है।
2026 में अब तक रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन गया है, और इसकी गिरावट पिछले साल से जारी है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की तेल आयात पर ज्यादा निर्भरता के कारण, वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर रुपए पर ज्यादा पड़ता है।
इन चुनौतियों के बावजूद, नीति-निर्माता भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सावधानी के साथ सकारात्मक नजरिया बनाए हुए हैं।
हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक तनाव के कारण अपने अनुमान घटाए हैं।
इस महीने की शुरुआत में नागेश्वरन ने यह भी कहा था कि तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं और हालात सामान्य होने में समय लग सकता है।
अमेरिका-भारत स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि मौजूदा संघर्ष का असर चार तरीकों से पड़ सकता है—ऊर्जा की ऊंची कीमतें, कच्चे माल की सप्लाई में बाधा, लॉजिस्टिक्स और बीमा लागत में बढ़ोतरी, और विदेश से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) में कमी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति को देखते हुए धैर्य रखना जरूरी है, क्योंकि अर्थव्यवस्था को सामान्य होने में समय लग सकता है।
--आईएएनएस 

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