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वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते सोने-चांदी की कीमतें धड़ाम, हफ्ते भर में गोल्ड करीब 3.3 प्रतिशत तो सिल्वर 7.8 प्रतिशत फिसली

Source : business.khaskhabar.com | Oct 24, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 gold and silver prices plummet amid global uncertainties gold drops by nearly 33 and silver by 78 over the week 855840नई दिल्ली । वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते सोना और चांदी इस सप्ताह भारी दबाव में रहे और दोनों कीमती धातुओं ने तेज गिरावट दर्ज की। सोने की कीमतों में इस सप्ताह करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो जून के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। वहीं चांदी भी लगातार बिकवाली के दबाव में रही और इसकी कीमतों में इस सप्ताह 7.8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली, जो नवंबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। 
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने की आशंकाओं ने सोने-चांदी की मांग को प्रभावित किया है। चूंकि सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में इसकी आकर्षण क्षमता कम हो जाती है।
घरेलू बाजार में भी अंतरराष्ट्रीय कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का दिसंबर वायदा भाव गिरकर 1,42,150 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोना 1,42,079 रुपए प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया, जो पिछले सत्र की तुलना में लगभग 1,230 रुपए यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
चांदी में और बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिसंबर वायदा चांदी का भाव करीब 1,95,408 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया, जिसमें 4,191 रुपए यानी 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लगातार बिकवाली के कारण चांदी का भाव अब 2 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना हुआ है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो, शनिवार सुबह कॉमेक्स गोल्ड 1.24 प्रतिशत गिरकर 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया, जबकि कारोबार के दौरान यह 3,989.10 डॉलर प्रति औंस तक फिसला, जो 20 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। जबकि कॉमेक्स पर चांदी करीब 1.9 प्रतिशत गिरकर 53.96 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। हूती हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 116.7 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। ऊंचे तेल दाम महंगाई को बढ़ा सकते हैं, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर के अंत में होने वाली फेडरल रिजर्व बैठक में ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना सीमित है, लेकिन दिसंबर में दरें बढ़ाए जाने की संभावना अभी भी 80 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यही वजह है कि निवेशक सोने और चांदी में नई खरीदारी करने से बच रहे हैं।
इसके अलावा, मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी सोने की मांग को कमजोर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल महंगाई और ब्याज दरों से जुड़ी चिंताएं बुलियन बाजार के लिए नकारात्मक माहौल बना रही हैं।
आने वाले दिनों में बाजार की नजर अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़ों पर रहेगी, जिन्हें फेडरल रिजर्व महंगाई का प्रमुख संकेतक मानता है। इसके अलावा यूरोपीय सेंट्रल बैंक की बैठक, चीन के आर्थिक आंकड़े और वैश्विक ऊर्जा बाजार से जुड़े घटनाक्रम भी सोना-चांदी की दिशा तय करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है और केंद्रीय बैंक सख्त रुख जारी रखते हैं, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि किसी बड़े भू-राजनीतिक जोखिम या आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति में सोना फिर सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन भी पा सकता है।
--आईएएनएस
 

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