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पाकिस्तान में बढ़ती ईंधन और बिजली की कीमतों के बीच जनता की खामोशी पर उठे सवाल

Source : business.khaskhabar.com | Sep 19, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 questions raised over public silence amid rising fuel and electricity prices in pakistan 845865नई दिल्ली । पाकिस्तान में ईंधन, बिजली और गैस की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर चिंता बढ़ रही है। महंगाई और कमजोर क्रय शक्ति से जूझ रही जनता पर बढ़ती लागत का दबाव लगातार बढ़ने के बावजूद कीमतों में वृद्धि के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन नहीं होना सवाल खड़े कर रहा है। एक रिपोर्ट में इसे आर्थिक कमजोरी के साथ-साथ प्रभावी राजनीतिक नेतृत्व की कमी से जोड़कर देखा गया है।
 






‘द फ्राइडे टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और उपयोगिता सेवाओं के टैरिफ में बार-बार बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे परिवारों पर जीवन-यापन की लागत का बोझ और बढ़ गया है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की करीब आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रही है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिसका प्रभाव खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देता है। इससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं।


आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ बड़े पैमाने पर जन आंदोलन सीमित रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसके पीछे राजनीतिक विखंडन, विपक्ष की कमजोर लामबंदी, एकजुट नेतृत्व का अभाव और नीति निर्माण को प्रभावित करने की जनता की क्षमता में घटता विश्वास जैसे कई कारण हैं।


रिपोर्ट में पाकिस्तान के इतिहास के उन दौरों से भी मौजूदा स्थिति की तुलना की गई है, जब आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षाकृत मामूली वृद्धि के बावजूद व्यापक जन आंदोलन देखने को मिले थे।


मौजूदा परिस्थितियां पाकिस्तान में हो रहे व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बदलावों की ओर भी इशारा करती हैं। इनमें यथास्थिति के प्रति बढ़ती प्रवृत्ति और सामूहिक लामबंदी के लिए सीमित होती जगह शामिल है।


रिपोर्ट में पाकिस्तान की बड़ी युवा आबादी पर भी चर्चा की गई है, जो देश की आबादी का बड़ा हिस्सा है। युवाओं को अक्सर राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का संभावित वाहक माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार आर्थिक अनिश्चितता, सामाजिक विभाजन और संगठित नेतृत्व की कमी ने व्यापक स्तर पर उनकी लामबंदी को सीमित किया है।


रिपोर्ट के अनुसार, जब तक शासन व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और संस्थागत स्तर पर मौजूद व्यापक चुनौतियों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक बढ़ती जीवन-यापन लागत का दबाव परिवारों पर बना रहेगा। इससे देश में सार्वजनिक असंतोष और आर्थिक असुरक्षा और बढ़ सकती है।


--आईएएनएस


 

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