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त्योहारी सीजन से पहले मिठास पर महंगाई का तड़का: चीनी में रिकॉर्ड उछाल, खुदरा भाव 70 रुपये प्रति किलो के पार

Source : business.khaskhabar.com | Aug 20, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 ahead of the festive season inflation hits sweetness sugar prices hit a record high with retail prices crossing rs 70 per kg 838148
बिजनेस डेस्क। जयपुर 
त्योहारों की आहट के साथ ही आम उपभोक्ता की रसोई का बजट एक बार फिर बुरी तरह गड़बड़ा गया है। रोजमर्रा की सबसे अनिवार्य वस्तु मानी जाने वाली चीनी की कीमतों में पिछले दो से तीन हफ्तों के भीतर अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। महज पंद्रह से बीस दिनों के अंतराल में चीनी के दामों में 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक का भारी इजाफा दर्ज किया गया है। खुदरा बाजार में जो चीनी कुछ हफ्ते पहले तक सामान्य दरों पर उपलब्ध थी, वह अब 68 से 70 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर बेची जा रही है। 

राजधानी जयपुर की प्रमुख सूरजपोल कृषि उपज मंडी में स्थिति यह है कि थोक बाजार में चीनी के भाव 6150 रुपये से बढ़कर 6400 रुपये प्रति क्विंटल (61.50 से 64 रुपये प्रति किलो) तक पहुंच चुके हैं। बाजार में अनिश्चितता का माहौल इस कदर हावी है कि थोक मंडियों में एक ही दिन के भीतर कीमतों में तीन से चार बार संशोधन हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि बाजार में आई इस बेतहाशा तेजी के पीछे उत्पादन में किसी प्रकार की गिरावट कारण नहीं है। 

चीनी मिलों के प्रमुख संगठन 'इस्मा' (ISMA) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर से शुरू हुए चालू पेराई सत्र में 31 जुलाई तक देश में कुल 349 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 295 लाख टन था। इस प्रकार चालू पेराई सत्र में देश भर में चीनी के उत्पादन में 18 फीसदी से अधिक की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बावजूद मंडियों में पैदा हुई कृत्रिम कमी और बढ़ती कीमतों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

बाजार विश्लेषकों और कारोबारियों का मानना है कि रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के नजदीक आते ही खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, मिष्ठान्न निर्माताओं और बेकरी उद्योग की तरफ से चीनी की थोक मांग में अचानक जबरदस्त उछाल आया है। इसके साथ ही मिलों द्वारा सीमित घरेलू आपूर्ति और घटते बफर स्टॉक की वजह से जमाखोरी और सट्टेबाजी की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। 
आम जनता के लिए चिंता का मुख्य विषय यह है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में आने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कीमतों को नियंत्रित करने या खुली मंडियों में आपूर्ति बढ़ाने के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे खुदरा खरीदारों पर सीधा आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

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