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ब्रिक्स देशों ने सतत विकास और ग्लोबल साउथ के लिए एआई तक समान पहुंच के एजेंडे का किया समर्थन

Source : business.khaskhabar.com | Oct 27, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 brics nations support agenda for sustainable development and equitable access to ai for the global south 856692नई दिल्ली। ब्रिक्स सदस्य देशों की संसदों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को सतत विकास के लिए 2030 एजेंडे के कार्यान्वयन में तेजी लाने, विकासशील देशों की चुनौतियों से निपटने के लिए डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करने और ग्लोबल साउथ के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तक समान पहुंच सुनिश्चित करने का समर्थन किया।

 





यहां आयोजित बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, प्रतिनिधियों ने वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का पुरजोर समर्थन किया। भारत की अध्यक्षता की थीम 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' है। यह साझा चुनौतियों से निपटने के लिए संतुलित, समावेशी और दूरदर्शी तरीके से ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।



'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को प्रोत्साहित करना' विषय पर आयोजित इस बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की संसदों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संयुक्त वक्तव्य में गरीबी के सभी रूपों, विशेषकर अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन, दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती और सतत विकास की पूर्वशर्त बताया गया। साथ ही, वर्ष 2030 के बाद सतत विकास के वैश्विक एजेंडे को आकार देने में ब्रिक्स देशों के घनिष्ठ सहयोग और सार्थक योगदान की उम्मीद जताई गई।



जलवायु परिवर्तन से निपटने की तात्कालिकता को स्वीकार करते हुए ब्रिक्स देशों ने संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से प्रयास तेज करने का आह्वान किया। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को लागू करना, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और उनके अनुकूलन के प्रयासों को मजबूत करना तथा न्यायसंगत बदलाव के रास्तों को बढ़ावा देना शामिल है। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करना है।



वक्तव्य में विकसित देशों से विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल बनने और उससे निपटने के लिए अतिरिक्त, पर्याप्त, पूर्वानुमान योग्य और सुलभ वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की अपील भी की गई। इसके साथ ही, आपसी सहमति से तय शर्तों पर क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी विकास और उसके हस्तांतरण में सहयोग देने पर जोर दिया गया।



ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) सहित उभरती तकनीकों की परिवर्तनकारी क्षमता को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि आईसीटी का इस्तेमाल और विकास खुला, सुरक्षित, स्थिर, शांतिपूर्ण, परस्पर अनुकूल और समान रूप से सुलभ होना चाहिए। साथ ही, प्रत्येक देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा का सम्मान भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।



संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, “हम मानते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सभी के लिए आर्थिक विकास और सतत विकास को गति देने का बड़ा अवसर प्रदान करती है। हम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और लागू कानूनों के अनुरूप एआई संसाधनों, क्षमता निर्माण, ज्ञान और अवसरों तक समान पहुंच बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को भी स्वीकार करते हैं। इसके साथ ही एआई का सुरक्षित, समावेशी और विश्वसनीय विकास तथा उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।”



वक्तव्य में कहा गया कि एआई प्रणालियों की ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना, एआई विज्ञान और नवाचार को प्रोत्साहित करना, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए एआई का उपयोग करना तथा इससे जुड़े संभावित जोखिमों को कम करना आवश्यक है। इससे सभी देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए न्यायसंगत, निष्पक्ष और समृद्ध भविष्य को बढ़ावा मिल सकेगा।



इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों की डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसके तहत डेटा गोपनीयता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के साथ-साथ मजबूत राष्ट्रीय तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर बल दिया गया।



संयुक्त वक्तव्य में सभी के लिए सार्वभौमिक और सार्थक डिजिटल कनेक्टिविटी हासिल करने की ब्रिक्स की प्रतिबद्धता दोहराई गई। प्रतिनिधियों ने आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन, सार्वजनिक सेवाओं की बेहतर आपूर्ति तथा लचीलेपन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल अवसंरचना, विशेष रूप से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के विस्तार में सहयोगात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित किया।



इस संबंध में ब्रिक्स देशों के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना रिपॉजिटरी शुरू करने के प्रस्ताव और डिजिटल परिवर्तन के लिए डीपीआई समाधानों की प्रायोगिक परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया।



--आईएएनएस

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