businesskhaskhabar.com

Business News

Home >> Business

भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा: उद्योग जगत

Source : business.khaskhabar.com | Oct 21, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india new zealand trade agreement to open new opportunities for exporters industry 854953नई दिल्ली । उद्योग संगठन एसोचैम ने बुधवार को भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने का स्वागत करते हुए कहा कि यह समझौता विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करेगा तथा निर्यातकों, विनिर्माण क्षेत्र और छोटे कारोबारों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। 
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी बताते हुए कहा कि न्यूजीलैंड के बाजार में मिलने वाली ड्यूटी-फ्री पहुंच भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगी।
उन्होंने कहा, "इस समझौते की वास्तविक सफलता उन अवसरों से मापी जाएगी, जो यह पैदा करेगा और दोनों देशों के लोगों के जीवन पर जो सकारात्मक प्रभाव डालेगा।"
मिंडा ने यह भी कहा कि भारत से न्यूजीलैंड के लिए पहली बार निर्यात की गई जेसीबी मशीन, जिसे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रवाना किया, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।
समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत के 8,284 उत्पाद वर्गों (टैरिफ लाइन्स) पर तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान की है। इससे फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, मशीनरी, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, फुटवियर तथा चमड़ा उद्योग जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
उद्योग संगठन के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का न्यूजीलैंड को निर्यात 71.1 करोड़ डॉलर रहा था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56.7 करोड़ डॉलर रहा। इसी अवधि में न्यूजीलैंड से भारत का आयात क्रमशः 58.7 करोड़ डॉलर और 58.9 करोड़ डॉलर रहा।
भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में 12.4 करोड़ डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में मामूली 2.2 करोड़ डॉलर का व्यापार घाटा दर्ज किया गया।
समझौते में कीवी फल, सेब, शहद, बागवानी, वानिकी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजनाएं भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य तकनीकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण और उत्पादकता बढ़ाना है।
वहीं भारत ने लकड़ी, ऊन और भेड़ के मांस जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क तत्काल समाप्त करने पर सहमति जताई है, जबकि 35.6 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किए जाएंगे।
समझौते के तहत मनुका हनी और कीवी फल जैसे चुनिंदा उत्पादों पर कोटा-आधारित रियायतों का भी प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, भारतीय पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए हर वर्ष 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा और 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा की व्यवस्था भी की गई है।
एसोचैम का कहना है कि यह व्यापार समझौता भारतीय एमएसएमई को मजबूत करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और भारतीय व्यवसायों को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से और अधिक जोड़ने में मदद करेगा। साथ ही यह भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, निवेश और व्यापक आर्थिक सहयोग को नई गति देगा।
--आईएएनएस
 

[@ जानिए क्यों ये आदमी 25 सालों से खा रहा है मिट्टी]


[@ गजब! अजगर और मगर के बीच रहता है ये परिवार]


[@ यहां "पवित्र" लडकियों को मिलती है स्कॉलरशिप]