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आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक में छह स्थान फिसला भारत, 88वें स्थान पर पहुंचा

Source : business.khaskhabar.com | Oct 19, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india slips six places in the economic freedom index reaches 88th position 854489
फ्रेजर इंस्टिट्यूट द्वारा जारी वैश्विक आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक में हांगकांग शीर्ष पर बरकरार, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर
सूची में यूएस 5वें, यूके 10वें, जापान 13वें, जर्मनी 19वें, फ्रांस 39वें, इटली 47वें, साऊथ कोरिया 53वें, ब्राजील 85वें, चीन 110वें और रूस 143वें स्थान पर
पाकिस्तान को 133वां, बांग्लादेश को 129वां, श्रीलंका को 119वां और नेपाल को 90वां स्थान
 
नई दिल्ली। फ्रेजर इंस्टिट्यूट, कनाडा द्वारा वार्षिक आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक 2026 को जारी कर दिया गया है। भारत में यह सूचकांक थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) के संयुक्त तत्वावधान में जारी किया गया है। प्रतिवर्ष जारी होने वाले इस सूचकांक में भारत ने 10 में 6.62 अंक प्राप्त करते हुए 88वां स्थान हासिल किया। गतवर्ष भारत को 6.66 अंकों के साथ 82वां स्थान प्राप्त हुआ था। जारी सूचकांक में हांगकांग ने 8.53 अंकों के साथ फिर से शीर्ष स्थान हासिल किया है। दूसरा, तीसरा और चौथा स्थान क्रमशः स्विट्जरलैंड, सिंगापुर और न्यूजीलैंड को मिला हैं। सूची में यूएस को पांचवा स्थान प्राप्त हुआ है। 165 देशों की इस सूची में वेनेजुएला को अंतिम स्थान प्राप्त हुआ है।
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार यूके, जर्मनी, जापान, फ्रांस, इटली और साउथ कोरिया को सूची में क्रमशः 10वां, 19वां, 13वां, 39वां, 47वां और 53वां स्थान प्राप्त हुआ है। सूची में चीन को 110वां, रूस को 143वां, बांग्लादेश को 129वां, श्रीलंका को 119वां और नेपाल को 90वां स्थान प्राप्त हुआ है।   
‘इकोनॉमिक फ्रीडम ऑफ द वर्ल्डः 2026 एनुअल रिपोर्ट’ विश्व के 165 देशों में सरकार के आकार, विधिक प्रणाली और संपत्ति के अधिकार, वैश्विक व्यापार की स्वतंत्रता, नियमन और स्थिर और विश्वसनीय धन तक पहुंच जैसे पांच मानकों के आधार पर प्रतिवर्ष जारी किया जाता है। रिपोर्ट को जारी करते हुए सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के सीईओ डा. अमित चंद्रा ने कहा कि इस वर्ष न केवल भारत की रैंकिंग में गिरावट आई बल्कि विभिन्न मानको के आधार पर होने वाली स्कोरिंग में भी भारत का प्रदर्शन गतवर्ष की तुलना में खराब रहा। 
फ्रेजर इंस्टिट्यूट के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, कोविड महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर नीति निर्धारकों के द्वारा आरोपित कई प्रकार के नियमनों, व्यापार की राह में लगाये गये अवरोधों, सरकार के आकार में की गई वृद्धि, और खर्च के लिये मुद्रा की अधिक छपाई आदि के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक स्वतंत्रता में गिरावट आयी। हालांकि बाद में सरकारों द्वारा अपनी नीतियों को बदलने के बावजूद देशों में आर्थिक स्वतंत्रता कोविड पूर्व की अवस्था में नहीं लौट सकी है। यह सूचकांक वर्ष 2024 के आंकड़ों पर आधारित है।

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