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एनसीएलटी ने वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित किया, एसबीआई 12,668 करोड़ रुपए की करेगा वसूली 

Source : business.khaskhabar.com | Nov 06, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 nclt declares videocon venugopal dhoot bankrupt sbi to recover ₹12668 crore 859111नई दिल्ली । नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को दिए गए लोन के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी के एवज में 12,668 करोड़ रुपए से अधिक की बकाया राशि वसूलने की मांग की गई थी। 
ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) की धारा 123 के तहत एसबीआई की याचिका को स्वीकार कर लिया है। इससे धूत के खिलाफ एक पर्सनल गारंटर के तौर पर दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
यह आदेश तब आया है, जब लेनदारों द्वारा भुगतान योजना को खारिज कर दिए जाने के बाद धूत की पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया विफल हो गई।
ट्रिब्यूनल ने इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया है। साथ ही, यह निर्देश दिया है कि धूत की संपत्ति उनके हवाले कर दी जाए, ताकि वे इसका प्रबंधन कर सकें और लेनदारों के बीच इसका वितरण कर सकें।
एसबीआई के अनुसार, 30 सितंबर तक धूत पर कुल 12,668.06 करोड़ रुपए की देनदारी थी, जिसमें ब्याज और जुर्माना भी शामिल है।
यह बकाया राशि उन पर्सनल गारंटियों से जुड़ी है, जो धूत ने वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनियों को दिए गए टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल सुविधाओं और अन्य कर्जों के लिए दी थीं, जिसमें वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड भी शामिल है।
ग्रुप द्वारा लोन न चुकाने के बाद, बैंक ने फरवरी 2018 में इन गारंटियों को लागू कर दिया था।
पर्सनल इनसॉल्वेंसी कार्यवाही के दौरान, धूत ने एक भुगतान योजना पेश की। इसमें सिलीगुड़ी में एक रियल एस्टेट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के जरिए तीन साल में 600 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव था। यह रकम कुल स्वीकृत दावों के 1 प्रतिशत से भी कम थी।
हालांकि, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव भविष्य में मिलने वाली प्रोजेक्ट मंजूरियों और अनिश्चित कैश फ्लो पर निर्भर है और इसमें कोई भी अग्रिम भुगतान नहीं दिया गया है।
इसके बाद, लेनदारों ने इस योजना को मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
ट्रिब्यूनल ने इस साल जुलाई में इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया को समाप्त कर दिया और लेनदारों को बैंकरप्सी की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी।
इसके बाद एसबीआई ने तय समय-सीमा के भीतर अपनी बैंकरप्सी याचिका दायर कर दी।
इसके अलावा, बैंकरप्सी ट्रस्टी को निर्देश दिया गया है कि वे लेनदारों से उनके दावे आमंत्रित करें, धूत की संपत्ति को अपने नियंत्रण में लें और 90 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल को एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपें।
--आईएएनएस
 

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