मंडियों में नए गुड़ की दस्तक : जयपुर में 60 रुपए तक पहुंचे थोक भाव; चीनी में तेजी से बढ़ी प्राकृतिक मिठास की चमक
Source : business.khaskhabar.com | Oct 26, 2026 | 

बिजनेस डेस्क। जयपुर त्योहारी सीजन और सर्दियों की दस्तक के साथ ही देश भर के प्रमुख उत्पादक केंद्रों एवं थोक कृषि उपज मंडियों में नए गुड़ की आवक ने रफ्तार पकड़ ली है। देश की सबसे बड़ी गुड़ मंडी के रूप में विख्यात उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर मंडी में प्रतिदिन औसतन छह हजार मन नए गुड़ की बंपर आवक दर्ज की जा रही है।
वहीं, राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित प्रमुख सूरजपोल मंडी में भी सप्ताह के पहले कारोबारी दिन करीब छह ट्रकों में लदे नए गुड़ की खेप पहुंची।
मंडियों में शुरुआत में आवक का दबाव बनने से जहां कीमतों में तात्कालिक रूप से नरमी का माहौल देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चीनी की थोक कीमतों में हालिया मजबूती और प्राकृतिक उत्पादों के प्रति बढ़ते रुझान के कारण गुड़ की खपत में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। खाद्य एवं मिष्ठान उद्योग के साथ-साथ कई उपभोक्ता उत्पादों में चीनी के स्वस्थ विकल्प के रूप में गुड़ का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने से बाजार में इसकी मांग लगातार दबाव बनाए हुए है।
स्थानीय सूरजपोल अनाज मंडी स्थित प्रतिष्ठित व्यापारिक फर्म महालक्ष्मी एंड कंपनी के संचालक मुरारीलाल अग्रवाल ने कारोबारी स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि सोमवार को मंडी में अलग-अलग किस्मों के नए गुड़ का थोक व्यापार 52 से 56 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहा। मंडी के ताजा भावों के अनुसार ढैया गुड़ 53 से 56 रुपये, पतासी गुड़ 52 से 55 रुपये, लड्डू गुड़ 53 से 56 रुपये तथा रसकट गुड़ 54 से 56 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बोला गया। हालांकि, गुणवत्ता और स्थानीय खुदरा मांग के आधार पर बेहतरीन लॉट्स के सौदे 60 रुपये प्रति किलो तक के भावों में भी तय हुए हैं।
कारोबारी मुरारीलाल के अनुसार, इस वर्ष अनुकूल मौसमी परिस्थितियों और गन्ने की भरपूर पैदावार के चलते पेराई का काम अक्टूबर माह में ही पूरी क्षमता के साथ गति पकड़ चुका है। मुजफ्फरनगर की नवीन गुड़ मंडी में पिछले सत्र का पुराना स्टॉक अब लगभग समाप्ति की ओर है और नए गन्ने की आवक जोर पकड़ने से क्रशरों तथा कोल्हुओं पर नया गुड़ तैयार करने का काम चौबीसों घंटे चल रहा है।
कारोबारी जानकारों का कहना है कि सर्दी का मौसम शुरू होते ही पारंपरिक रूप से घरेलू खपत में गुड़ की पूछपरख काफी बढ़ जाती है। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारत वैश्विक स्तर पर कुल गुड़ उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले उत्पादित करता है। हाल के वर्षों में पैकेज्ड, जैविक और प्राकृतिक मिठास के रूप में गुड़ का घरेलू एवं वैश्विक बाजार बहुत तेजी से विस्तृत हुआ है। मुजफ्फरनगर के खास स्वाद वाले गुड़ की मांग समूचे देश के विभिन्न राज्यों के अलावा खाड़ी देशों और पश्चिमी बाजारों में भी व्यापक पैमाने पर बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुजफ्फरनगर के गुड़ को 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत चयनित किए जाने के बाद से इसे न केवल अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, बल्कि आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात प्रोत्साहन से किसानों व स्थानीय गुड़ निर्माताओं को भी बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहे हैं। जानकारों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में सर्दी का असर और बढ़ने के साथ ही मंडियों में आवक और खपत दोनों में नई तेजी देखने को मिलेगी।
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