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भारत की पहली निजी ऑर्बिटल रॉकेट उड़ान की तैयारी तेजी, 18 जुलाई को विक्रम-1 की पहली टेस्ट फ्लाइट करेगी स्काईरूट एयरोस्पेस

Source : business.khaskhabar.com | July 17, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 preparations for indias first private orbital rocket flight accelerate skyroot aerospace to conduct vikram 1s first test flight on july 18th 829383नई दिल्ली । देश की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने गुरुवार को घोषणा की कि वह 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (एसडीएससी-शार) के पहले लॉन्च पैड से अपने विक्रम-1 ऑर्बिटल रॉकेट की पहली टेस्ट फ्लाइट का प्रयास करेगी। 
यह लॉन्च कई मायनों में ऐतिहासिक होगा, क्योंकि पहली बार किसी निजी भारतीय कंपनी द्वारा पूरी तरह डिजाइन और विकसित किया गया ऑर्बिटल श्रेणी का रॉकेट भारतीय धरती से उड़ान भरने का प्रयास करेगा।
विक्रम-1 अपने साथ कई टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड लेकर जाएगा, जिसमें ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के अपने स्कोप (एससीओपीई) के पेलोड शामिल हैं। इसके अलावा, कॉसमोस डायमंड्स की कलाकृति "कॉस्मिक ब्लूम" और एक माइक्रो-आर्ट पीस भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।
एक बयान में कंपनी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों ने लॉन्च के लिए आवश्यक एयरस्पेस और मैरिटाइम नोटिस जारी कर दिए हैं, जिसके तहत लॉन्च के दिन विक्रम-1 के उड़ान मार्ग और संभावित प्रभाव क्षेत्र के आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्रों को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया है।
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पवन कुमार चंदाना ने कहा कि विक्रम-1 की जमीनी स्तर पर हर संभव परीक्षण प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब कंपनी पहली बार वास्तविक उड़ान के दौरान उसके प्रदर्शन को देखने के लिए उत्साहित है। उन्होंने कहा कि यह पहली टेस्ट फ्लाइट है और इससे कंपनी को कई महत्वपूर्ण तकनीकी आंकड़े प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि यह मिशन स्काईरूट के नियमित अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगा। उनके अनुसार, छोटे सैटेलाइट लॉन्च का वैश्विक बाजार फिलहाल आपूर्ति की कमी से जूझ रहा है, जबकि अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह स्थिति स्काईरूट जैसी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
करीब सात मंजिला ऊंचाई वाला विक्रम-1 एक मल्टी-स्टेज रॉकेट है, जिसे पूरी तरह कार्बन कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर से बनाया गया है। इसमें कंपनी द्वारा विकसित प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 3डी-प्रिंटेड इंजन और उच्च क्षमता वाले सॉलिड-फ्यूल बूस्टर शामिल हैं।
'मिशन आगमन' नाम का यह अभियान स्काईरूट का दूसरा मिशन है। इससे पहले कंपनी ने 18 नवंबर 2022 को विक्रम-एस की सफल सब-ऑर्बिटल उड़ान पूरी की थी, जो भारतीय धरती से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला निजी रॉकेट बना था।
विक्रम-1 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे सैटेलाइट स्थापित कर सके। इसकी पहली टेस्ट फ्लाइट का लक्ष्य 60 डिग्री झुकाव के साथ 450 किलोमीटर ऊंचाई की कक्षा तक पहुंचना है।
--आईएएनएस 

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