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आरबीआई ने फेमा उल्लंघन मामले में एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स को दी राहत, 40.52 लाख रुपए जमा करने पर ईडी की जांच हुई बंद

Source : business.khaskhabar.com | July 17, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 rbi grants relief to apothecon pharmaceuticals in fema violation case ed investigation closed after deposit of ₹4052 lakh 829384नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फेमा यानी फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (एफईएमए) के प्रावधानों के उल्लंघन के मामले में कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया है। इसके तहत कंपनी ने एकमुश्त 40.52 लाख रुपए का भुगतान किया, जिसके बाद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच बंद कर दी गई। ईडी ने गुरुवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। 
ईडी के अनुसार, आरबीआई ने एफईएमए की धारा 15 के तहत यह कंपाउंडिंग ऑर्डर ईडी की ओर से जारी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मिलने के बाद जारी किया।
बयान के मुताबिक, विश्वसनीय जानकारी मिलने के बाद ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की थी, जिसमें पाया गया कि कंपनी ने करीब 9.91 करोड़ रुपए की विदेशी राशि प्राप्त होने के बाद फॉर्म एआरएफ जमा करने में देरी की थी। इसके अलावा, लगभग 29.97 करोड़ रुपए से जुड़े एफसी-जीपीआर फॉर्म दाखिल करने में भी विलंब किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने फेमा नियमों का उल्लंघन करते हुए विदेशी धनराशि प्राप्त होने से पहले ही 18.48 लाख रुपए मूल्य के शेयर जारी कर दिए थे। वहीं, लगभग 2.25 करोड़ रुपए मूल्य के शेयर विदेशी निवेश मिलने के 180 दिन से अधिक समय बाद जारी किए गए, जो नियमों के विरुद्ध था।
इसके अलावा, कंपनी ने तीन मामलों में भारत सरकार की पूर्व मंजूरी लिए बिना ही शेयर आवंटित किए, जिसे भी फेमा के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया।
ईडी की जांच के दौरान कंपनी ने फेमा की धारा 15 के तहत इन उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए आरबीआई के समक्ष आवेदन किया। आरबीआई के अनुरोध पर ईडी ने कानून की भावना के अनुरूप कंपाउंडिंग के लिए एनओसी जारी कर दी। इसके बाद आरबीआई ने 6 जुलाई 2026 के कंपाउंडिंग ऑर्डर के जरिए इन उल्लंघनों का निपटारा कर दिया।
ईडी ने स्पष्ट किया कि उसकी नीति के अनुसार, यदि कोई उल्लंघन कंपाउंडिंग के लिए पात्र है, निर्धारित शर्तें पूरी करता है और उसके खिलाफ कोई लंबित जांच या अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो विभाग एनओसी जारी करता है। इससे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलता है, अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होती है और कारोबार करने में आसानी को प्रोत्साहन मिलता है।
बयान में कहा गया कि फेमा मुख्य रूप से एक सिविल कानून है, जिसकी धारा 15 के तहत धारा 13 में दंडनीय उल्लंघनों की कंपाउंडिंग का प्रावधान किया गया है, ताकि स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिले, मुकदमों की संख्या कम हो और मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।
फेमा के तहत कंपाउंडिंग की प्रक्रिया फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 में निर्धारित की गई है। इन नियमों में आवेदन दाखिल करने, मामलों की जांच करने और कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी करने की पूरी प्रक्रिया तय की गई है।
हालांकि, नियमों के अनुसार कुछ गंभीर उल्लंघनों की कंपाउंडिंग नहीं की जा सकती। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण या देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाले मामलों से जुड़े एफईएमए उल्लंघन शामिल हैं।
फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 के नियम 3 के तहत आरबीआई अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पात्र मामलों की कंपाउंडिंग करने वाला सक्षम प्राधिकारी है। आरबीआई ने फेमा के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए मास्टर डायरेक्शन भी जारी किए हैं, जिनमें उल्लंघन की प्रकृति, गंभीरता, अवधि और संबंधित राशि के आधार पर कंपाउंडिंग शुल्क तय करने का विस्तृत ढांचा निर्धारित किया गया है।
--आईएएनएस
 

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