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रक्षाबंधन पर इस साल देश में 30,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार होने की उम्मीद : प्रवीण खंडेलवाल

Source : business.khaskhabar.com | Aug 25, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 raksha bandhan is expected to generate business worth over rs 30000 crore in the country this year praveen khandelwal 839401
बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 

देशभर में रक्षाबंधन के अवसर पर इस बार 30,000 करोड़ रुपए का कारोबार होने की उम्मीद है। इसमें से अकेले राखी का कारोबार 25,000 करोड़ रुपए का पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी चांदनी चौक से सांसद एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने मंगलवार को दी। 

खंडेलवाल ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व में अब केवल चार दिन शेष रहने के साथ ही दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में खरीदारी अपने चरम पर पहुंच गई है। दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली, लक्ष्मी नगर तथा विभिन्न स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। 

कैट को देशभर के व्यापारिक संगठनों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन पर केवल राखियों का कारोबार लगभग 25 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि अकेले दिल्ली में यह कारोबार 4 हजार करोड़ रुपए के आसपास रहने की संभावना है। यदि उपहार, मिठाइयों, परिधानों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी वस्तुओं, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और अन्य त्योहारी उत्पादों को भी शामिल किया जाए तो रक्षाबंधन से संबंधित कुल व्यापार 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक होने की संभावना है। 

खंडेलवाल के मुताबिक, इस वर्ष पारंपरिक राखियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं, भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प से प्रेरित राखियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विशेष रूप से विकसित भारत राखी, मोदी गारंटी राखी, ब्रह्मोस राखी, नारी वंदन राखी, आत्मनिर्भर भारत राखी, वोकल फॉर लोकल राखी, भारत गौरव राखी, लखपति दीदी राखी, नमामि गंगे राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और अमृतकाल राखी की मांग लगातार बढ़ रही है। 

उन्होंने बताया कि युवाओं और बच्चों में विशेष रूप से ब्रह्मोस राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और विकसित भारत राखी को लेकर असाधारण उत्साह देखा जा रहा है। वहीं महिलाओं के बीच नारी वंदन राखी तथा लखपति दीदी राखी विशेष लोकप्रिय हो रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं। 

खंडेलवाल के अनुसार, रक्षाबंधन का यह पर्व केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं रह गया है, बल्कि अब यह स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र गौरव का भी उत्सव बन चुका है। स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग से लाखों महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों और स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है। 

खंडेलवाल ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि आगामी सभी त्योहारों पर भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल, लोकल फॉर ग्लोबल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाएं। 

उन्होंने कहा, आज की स्वदेशी राखी केवल रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र गौरव का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। प्रत्येक राखी भारतीय कारीगरों के श्रम, भारतीय संस्कृति की समृद्धि और भारत के उज्ज्वल भविष्य का संदेश लेकर आ रही है। -आईएएनएस

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