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खुदरा महंगाई दर मई में 3.93 प्रतिशत रही; आलू, मटर और जीरे की कीमतें घटीं 

Source : business.khaskhabar.com | Jun 13, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 retail inflation stood at 393 in may prices of potatoes peas and cumin fell 820975नई दिल्ली । खुदरा महंगाई दर मई में सालाना आधार पर 3.93 प्रतिशत रही है। इस दौरान आलू, मटर, जीरे और गाड़ियों की कीमतों में कमी देखने को मिली है। यह अप्रैल 2026 में 3.48 प्रतिशत थी। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों में दी गई।  
सरकारी आंकड़ों में बताया गया कि मई में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 4.25 प्रतिशत रही है, जबकि शहरी इलाकों में यह 3.53 प्रतिशत थी। 
वहीं, मई में खुदरा खाद्य महंगाई दर 4.78 प्रतिशत रही है, जो कि अप्रैल में 4.20 प्रतिशत थी। 
ग्रामीण इलाकों में खुदरा खाद्य महंगाई दर 4.85 प्रतिशत रही है, जो कि शहरी इलाकों में बीते महीने 4.66 प्रतिशत थी। 
मई में सालाना आधार पर जिन शीर्ष पांच उत्पादों के दाम कम हुए हैं, उनमें आलू (-23.71 प्रतिशत), मटर (-11.47 प्रतिशत), मोटर कार एंड जीप (-7.19 प्रतिशत), जीरा (-4.59 प्रतिशत) और मोटर साइकिल और स्कूटर (-3.56 प्रतिशत) शामिल हैं। 
इस दौरान सालाना आधार पर जिन शीर्ष पांच उत्पादों में खुदरा महंगाई बढ़ी है, उनमें चांदी की ज्वेलरी (155.23 प्रतिशत), टमाटर (48.43 प्रतिशत), सोना,हीरा और प्लेटिनम ज्वेलरी (40.93 प्रतिशत), अदरक (32.49 प्रतिशत) और किशमिश (21.97 प्रतिशत) शामिल हैं। 
सरकारी आंकड़ों में बताया कि 50 लाख से अधिक की आबादी वाले शीर्ष पांच राज्यों में मई में सबसे अधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना (6.15 प्रतिशत), तमिलनाडु (5.11 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (4.90 प्रतिशत), कर्नाटक (4.59 प्रतिशत) और ओडिशा (4.54 प्रतिशत) में थी। 
 महंगाई में लगातार बढ़ोतरी से पता चलता है कि साल की शुरुआत में हालात सामान्य रहने के बाद अब कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, आयातित महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाने वाले मुख्य कारण हैं।
जून में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया। इसके पीछे अल-नीनो की वजह से मॉनसून के सामान्य से कम रहने की आशंका और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों जैसे जोखिमों का हवाला दिया गया।
--आईएएनएस
 

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