businesskhaskhabar.com

Business News

Home >> Business

पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन को 5,500 करोड़ रुपए के निवेश का भरोसा, 18 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद

Source : business.khaskhabar.com | Aug 05, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 commitments worth ₹5500 crore secured for the first telecom manufacturing zone over 18000 jobs expected to be created 834085मुंबई/नई दिल्ली/भोपाल । केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मुंबई में भारत के पहले और एकमात्र दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन-टीएमजेड) के लिए आयोजित दूसरे निवेशक सम्मेलन की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। इस दौरान परियोजना के लिए 2,000 करोड़ रुपए के नए निवेश की प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुईं। सम्मेलन में दूरसंचार क्षेत्र की लगभग 18 प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया और इन नए निवेशों से करीब 4,000 नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। 
मुंबई निवेशक सम्मेलन के बाद ग्वालियर के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए अब तक कुल 5,500 करोड़ रुपए के निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं। इससे 18 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
इससे पहले पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित पहले निवेशक गोलमेज सम्मेलन में 3,500 करोड़ रुपए के निवेश और 14 हजार रोजगार की घोषणा की गई थी। यह परियोजना के 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक निवेश आकर्षित करने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
निवेशकों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने दूरसंचार और डिजिटल क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर दूरसंचार उत्पादों के निर्माण में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने "मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड" और "लोकल फॉर ग्लोबल" के विजन को दोहराते हुए कहा कि अब भारत को सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर उत्पाद-आधारित अर्थव्यवस्था बनना होगा। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख रणनीतियां बताईं-देश में मूल्य संवर्धन बढ़ाना, भारत में बौद्धिक संपदा का सृजन करना और भारत में डिजाइन एवं निर्मित दूरसंचार उत्पादों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना।
सिंधिया ने आगे कहा कि जिस प्रकार भारत ने मोबाइल निर्माण और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, उसी मॉडल को अब दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक समय अधिकांश मोबाइल फोन आयात करने वाला भारत आज दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल निर्माण केंद्रों में शामिल है। वहीं, यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने यह साबित किया है कि भारत वैश्विक स्तर पर अपनाई जाने वाली तकनीकी प्रणालियां विकसित करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि ग्वालियर का दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र भी आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर सफलता का नया उदाहरण बनेगा, जिसे अन्य देश भी अपनाना चाहेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र विशेष आर्थिक क्षेत्रों की सफलता से प्रेरित देश की पहली ऐसी पहल है, जिसे पूरी तरह दूरसंचार उद्योग के लिए विकसित किया जा रहा है। यहां डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण, विनिर्माण, कलपुर्जे, अर्धचालक, ऑप्टिकल फाइबर, दूरसंचार उपकरण तथा संबद्ध उद्योगों सहित पूरी मूल्य शृंखला एक ही परिसर में विकसित की जाएगी। इसके साथ विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले परीक्षण सुविधाएं और साझा अवसंरचना भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सिंधिया ने कहा कि देश के मध्य में स्थित ग्वालियर उत्कृष्ट संपर्क सुविधा, विकसित औद्योगिक वातावरण, तैयार अवसंरचना, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से उपलब्ध कुशल मानव संसाधन और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत के कारण दूरसंचार उद्योग के लिए आदर्श निवेश केंद्र बनकर उभर रहा है।
उन्होंने बताया कि आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बेहतर सड़क संपर्क बनने के बाद दिल्ली-एनसीआर से ग्वालियर की यात्रा तीन घंटे से भी कम समय में पूरी हो सकेगी। इससे निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को और अधिक गति मिलेगी।
 

[@ खुलासा! गुप्त यूएफओ में दर्ज है ब्रिटेन में आए थे एलियन]


[@ इस दिशा में हो मंदिर, तो घर में होती है कलह]


[@ मस्जिद में सिर्फ महिलाए पढती हैं नमाज,ऎसा क्यों]