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बाजार की पाठशाला: मिस-सेलिंग क्या होती है? जिस पर आरबीआई कस रहा शिकंजा, जानें क्या है जुलाई से लागू होने वाला नया नियम 

Source : business.khaskhabar.com | Mar 28, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 market insights what is mis selling as the rbi tightens the noose learn about the new rules set to take effect in july 801777नई दिल्ली । देश में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में बढ़ती शिकायतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मिस-सेलिंग पर सख्त कदम उठाने जा रहा है। प्रस्तावित नए नियम जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं, जिनका मकसद ग्राहकों को गलत या भ्रामक जानकारी देकर बेचे जाने वाले वित्तीय उत्पादों पर रोक लगाना है। इसके तहत अगर किसी ग्राहक को लगे कि उसे गुमराह करके कोई प्रोडक्ट बेचा गया है, तो वह इसकी शिकायत कर सकेगा और जांच में शिकायत सही पाई जाने पर बैंक को पूरा पैसा लौटाना होगा। 
'मिस-सेलिंग' का मतलब है ग्राहक को गलत जानकारी देकर या उसकी जरूरत के खिलाफ कोई वित्तीय उत्पाद बेचना। आमतौर पर यह तब होता है जब बैंक कर्मचारी अपने टारगेट या कमीशन के दबाव में बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स को सही जानकारी दिए बिना बेच देते हैं। इसमें कई बार जोखिम, शर्तें और वास्तविक रिटर्न छिपा लिए जाते हैं।
बैंक में एफडी कराने आए ग्राहक को यूएलआईपी को सुरक्षित निवेश बताकर बेच देना, लोन के साथ जबरन बीमा जोड़ देना या बुजुर्ग व्यक्ति को लंबी अवधि की पॉलिसी थमा देना—ये सभी मिस-सेलिंग के उदाहरण हैं। कई बार ग्राहक को सिर्फ फायदे बताए जाते हैं, जबकि नुकसान या जोखिम की जानकारी नहीं दी जाती।
केंद्रीय बैंक के नए नियमों के तहत सभी बैंकों को ग्राहकों की शिकायत दर्ज करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनानी होगी। अगर ग्राहक को समयसीमा नहीं बताई गई है, तो वह उत्पाद खरीदने के 30 दिनों के भीतर शिकायत कर सकेगा। जांच में गलती साबित होने पर बैंक को न केवल उत्पाद रद्द करना होगा, बल्कि ग्राहक को पूरी राशि लौटानी होगी और हुए नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ेगी।
आरबीआई के मसौदे में यह भी कहा गया है कि बैंक अपने कर्मचारियों को मिस-सेलिंग के लिए किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं देंगे। साथ ही, थर्ड पार्टी प्रोडक्ट बेचने के 30 दिन के भीतर ग्राहकों से फीडबैक लेना अनिवार्य होगा। इस फीडबैक के आधार पर हर छह महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी।
पिछले कुछ वर्षों में बैंकों की थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स से होने वाली कमाई लगातार बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2024-25 में इस तरह के उत्पादों से हजारों करोड़ रुपए का कमीशन कमाया। इसी बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार और नियामक एजेंसियां अब सख्त रुख अपना रही हैं। हाल ही में निर्मला सीतारमण ने भी बैंकों को अपने मूल कार्य—जमा और ऋण—पर ध्यान देने की सलाह दी थी।
ऐसे में, ग्राहकों को किसी भी वित्तीय उत्पाद को खरीदने से पहले उसके दस्तावेज ध्यान से पढ़ने चाहिए। केवल मौखिक बातों पर भरोसा करने के बजाय लिखित जानकारी लेना जरूरी है। अगर किसी को लगता है कि उसके साथ गलत हुआ है, तो वह बैंक की वेबसाइट या बीमा लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कर सकता है।
--आईएएनएस 

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