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मध्य पूर्व संघर्ष के बीच इम्पोर्ट में रुकावटों का पाकिस्तान में दवाओं पर असर, सिर्फ 45 दिनों का स्टॉक बचा

Source : business.khaskhabar.com | Mar 13, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 middle east conflict disrupts imports impacting medicine supply in pakistan only 45 days stock remaining 798060नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे झगड़े की वजह से पाकिस्तान में जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इससे फार्मास्यूटिकल रॉ मटीरियल और दूसरी जरूरी सप्लाई के इम्पोर्ट में रुकावट आ रही है। 

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास फार्मास्यूटिकल रॉ मटीरियल का मौजूदा स्टॉक सिर्फ डेढ़ महीने के लिए ही काफी है। 

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष की वजह से कई इंटरनेशनल विमान रोक दी गई हैं। इसकी वजह से पाकिस्तान की जान बचाने वाली दवाएं, फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स और बेबी फॉर्मूला इंपोर्ट करने की क्षमता पर असर पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति के आम पाकिस्तानियों के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं, जो पहले से ही ज्यादा महंगाई और महंगी स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रहे हैं। 

अगर इस कमी की वजह से कीमतें बढ़ती हैं या उपलब्धता कम होती है, तो कैंसर, डायबिटीज और दिल की बीमारी जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को खास तौर पर नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, "उन मरीजों में से कई देश के पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम पर निर्भर हैं।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों के न्यूट्रिशन पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि बेबी फॉर्मूला ज्यादातर इंपोर्ट किया जाता है और लंबे समय तक रुकावट रहने से सप्लाई कम हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की इम्पोर्टेड फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स पर निर्भरता लंबे समय से हेल्थ एक्सपर्ट्स के बीच चिंता का विषय रही है।

कोरोना महामारी के दौरान, विशेषज्ञों ने देश में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स बनाने की सीमित क्षमता के बारे में चेतावनी दी थी और सस्ते इम्पोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने के जोखिमों को भी हाईलाइट किया था।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय उत्पादन क्षमता को मजबूत करने में बहुत कम प्रगति हुई। इससे देश ग्लोबल सप्लाई में रुकावटों के संपर्क में आ गया। रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि मौजूदा स्थिति घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को डेवलप किए बिना शॉर्ट-टर्म इम्पोर्ट सॉल्यूशन पर निर्भर रहने के जोखिमों को दिखाती है।

इसने सरकार से फार्मास्यूटिकल आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला मानने और कच्चे माल के लोकल उत्पादन के लिए टैक्स इंसेंटिव देने, फार्मास्यूटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने और इमरजेंसी स्टॉकपाइलिंग मैकेनिज्म बनाने जैसे कदम उठाने का आग्रह किया।

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि ऐसे उपायों के बिना, ग्लोबल सप्लाई चेन में लंबे समय तक रुकावट से देश में लाखों लोगों के लिए जीवन बचाने वाली दवाओं तक पहुंच पर काफी असर पड़ सकता है।

--आईएएनएस

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